मुंबई का अपराधी...!
Videosमुंबई के मिल मज़दूर पूरी तरह तबाह कर दिए गए। करीब ढाई लाख मिल मज़दूर। कांग्रेस की सरकारों के दौर में मिल मज़दूरों का जैसा हाल हुआ, वैसा शायद ही किसी और का हुआ हो। लेकिन आमची मुंबई की बात करने वाली शिवसेना ने भी कोई हस्तक्षेप नहीं किया। मिल मज़दूरों की ज़िंदगी उजड़ गई। घर चलाने के लिए, परिवार को ज़िंदा रखने के लिए उन्हें क्या-क्या करना पड़ा—इसकी झलक जयंत पवार के नाटक ‘अधांतर’ में साफ़ दिखाई देती है। शायद आपने देखा होगा। ये उस दौर की सच्चाई है— कई मिल मज़दूरों की बेटियाँ मजबूरी में बारों में काम करने लगीं। कई युवा लड़के सिर्फ़ पैसों के लिए, क्योंकि पिता कमा नहीं पा रहे थे, माँ के पास काम नहीं था— घर कैसे चले? इसी मजबूरी में वे अरुण गवळी की गैंग तक पहुँच गए। मिल मज़दूर बर्बाद हो गए। मिलें बंद हो गईं। और आज देखिए क्या हुआ— सब कुछ बेच दिया गया। आज वहाँ क्या खड़ा है? बाज़ार। बड़े-बड़े मॉल। और वहीँ, उन जगहों पर, आज मिल मज़दूरों के बच्चों को सेल्समैन के रूप में काम करते देखा जा सकता है। BMC is not a family business #notafamilybusiness
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