आवाज़ उठती है... घरानाशाही लड़खड़ाती है!
Videos"लोकतंत्र कोई घर की 'शादी का मंडप' नहीं है, जहाँ बेटे से कह दिया— ""बेटा, अब मंडप पर चढ़ जाओ... और फेरे ले लो!"" और महानगरपालिका कोई 'खानदानी रियासत' नहीं है, जो विरासत में पिता से बेटे को मिलती रहे। ""हम दो भाई, मिलकर मलाई खाएं""... ऐसा खेल आसानी से खेल लेंगे, ये गलतफहमी पालने वाले अब एक बात कान खोलकर सुन लें — जनता अब पहले की तरह खामोश रहने वाली नहीं है। वह अब जाग चुकी है, उसे सवाल पूछना आता है, आवाज़ उठाना आता है, और ज़रूरत पड़ी तो सत्ता को आईना दिखाने में भी वह पीछे नहीं हटती। अब सरनेम (आडनाव) पर तालियां नहीं बजेंगी, वंश के नाम पर वोट नहीं मिलेंगे, और विरासत के दम पर हुकूमत नहीं चलेगी। क्योंकि अब सिर्फ एक ही सवाल खड़ा होगा — ""आप कौन हैं?"" यह नहीं... बल्कि ""आपने क्या किया है?"" और यह सवाल कल नहीं, आज ही जवाब मांगा जा रहा है।" BMC is not a family business #notafamilybusiness
Continue watching