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BMC में ठोस कचरा प्रबंधन की दुर्दशा: परिवारवादी सत्ता के तहत पनपी घोटालों की संस्कृति...
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BMC में ठोस कचरा प्रबंधन की दुर्दशा: परिवारवादी सत्ता के तहत पनपी घोटालों की संस्कृति...

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मुंबई देश की आर्थिक राजधानी के रूप में जानी जाती है। देश की समग्र अर्थव्यवस्था को गति देने वाला यह महानगर केवल गगनचुंबी इमारतों, शेयर बाज़ार या कॉर्पोरेट मुख्यालयों तक सीमित नहीं है; बल्कि स्वच्छता, स्वास्थ्य, पर्यावरण और गुणवत्तापूर्ण नागरिक सुविधाएँ ही किसी शहर की वास्तविक पहचान बनाती हैं। परंतु दुर्भाग्यवश, मुंबई आज भी कचरे के पहाड़ों, बदबू, प्रदूषण और असफल ठोस अपशिष्ट (घनकचरा) प्रबंधन की समस्याओं में फँसी हुई है। इसके पीछे केवल जनसंख्या वृद्धि या झुग्गी-बस्तियाँ ही कारण नहीं हैं, बल्कि बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) पर वर्षों से बनी हुई वंशवादी सत्ता और उससे पैदा हुई भ्रष्ट, लापरवाह तथा जवाबदेही से रहित कार्य-संस्कृति को भी इसका प्रमुख कारण माना जा रहा है। 1997 से लगभग पच्चीस वर्षों तक बीएमसी पर एक ही राजनीतिक घराने का प्रभुत्व रहा। इतने लंबे समय तक महानगरपालिका पर सत्ता होने के बावजूद मुंबई आज “स्वच्छ महानगर” के रूप में क्यों नहीं पहचानी जाती—यह सवाल मुंबईकर पूछ रहे हैं। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन जैसे बुनियादी विषय पर भी बीएमसी विफल रही है, यह चित्र आधिकारिक रिपोर्टों से स्पष्ट हुआ है। CAG रिपोर्ट ने उजागर किया वास्तविक पक्ष केंद्र सरकार के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की 2024 की रिपोर्ट—“शहरी स्थानीय निकायों में कचरा प्रबंधन”—बीएमसी के प्रशासन पर सीधे उँगली उठाती है। वर्ष 2016-17 से 2021-22 के दौरान मुंबई में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन कितना ढीला और कमजोर था, यह इस रिपोर्ट से स्पष्ट होता है। बीएमसी क्षेत्र के 3,340 बल्क वेस्ट जनरेटरों में से 1,663—यानी लगभग 50 प्रतिशत संस्थाओं ने—कचरे का स्थल पर ही (ऑन-साइट) प्रसंस्करण नहीं किया। नियम हैं, आदेश हैं, नोटिस हैं; पर क्रियान्वयन कहाँ है—यह प्रश्न स्वाभाविक रूप से उठता है। नोटिस देकर, कागज़ों पर जुर्माना दिखाकर जिम्मेदारी से बच निकलना—यही पद्धति वर्षों से चल रही है, ऐसा संकेत मिलता है। देवनार कचरा डंपिंग ग्राउंड मुंबई के ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की विफलता का जीवंत उदाहरण है। 2016 से 2022 के बीच लगभग 51.28 लाख मीट्रिक टन बिना प्रसंस्करण वाला कचरा देवनार में डाला गया। पर्यावरणीय खतरे, स्वास्थ्य समस्याएँ और स्थानीय नागरिकों की कठिनाइयों की अनदेखी करके कचरा डालते जाना—यह किस प्रकार की “शहर-प्रबंधन नीति” है, यह सवाल गंभीरता से उठता है। ‘वेस्ट टू एनर्जी’ परियोजना: योजना का अभाव या राजनीतिक सुविधा? देवनार में कचरे की समस्या कम करने के लिए ‘वेस्ट टू एनर्जी’ परियोजना की घोषणा की गई थी। लेकिन निविदा प्रक्रिया, ठेके, भूगर्भीय रिपोर्ट, कार्यादेश—हर चरण पर देरी ही हुई। चार वर्षों से अधिक समय तक केवल कागज़ी कार्रवाई चलती रही, जबकि वास्तविकता में कचरा प्रतिदिन देवनार में जमा होता रहा। यह विलंब केवल प्रशासनिक विफलता था या कुछ विशेष हितों की रक्षा के लिए जानबूझकर समय खींचा गया—ऐसा संदेह भी व्यक्त किया जा रहा है। ‘प्रजा’ रिपोर्ट और ज़मीनी हकीकत मई 2025 में प्रकाशित ‘प्रजा फाउंडेशन’ की रिपोर्ट ने भी बीएमसी के दावों पर प्रश्नचिह्न लगाया। आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार बीएमसी दावा करती है कि 86 प्रतिशत कचरे का वर्गीकरण हो रहा है। लेकिन 46 ड्राय वेस्ट सेग्रिगेशन केंद्रों और डंपिंग ग्राउंड्स की जानकारी देखने पर स्पष्ट होता है कि स्रोत स्तर पर प्रभावी वर्गीकरण वास्तव में नहीं हो रहा। यानी आँकड़े कागज़ों पर सुंदर हैं, लेकिन वास्तविक स्थिति अलग है। बीएमसी ने जुलाई 2022 में ‘गार्बेज फ्री सिटी’ के लिए 3-स्टार रेटिंग हेतु आवेदन किया था, पर वह रेटिंग प्राप्त करने में असफल रही। यह असफलता बीएमसी के दीर्घकालीन प्रशासन पर एक गंभीर टिप्पणी के समान है। निर्माण कचरा और ‘सिस्टम’ का दुरुपयोग ठोस अपशिष्ट के साथ-साथ निर्माण और ध्वस्तीकरण से निकलने वाला कचरा भी गंभीर समस्या है। मुंबई के कई इलाकों में रात के समय सड़क किनारे निर्माण कचरा फेंका जाता है। नागरिकों की शिकायत है कि आधिकारिक परिवहनकर्ता होने के बावजूद वे समय पर नहीं आते और फोन तक नहीं उठाते। यह आरोप खुलेआम लगाया जाता है कि ये परिवहनकर्ता राजनीतिक संरक्षण में हैं, इसलिए उन पर कार्रवाई नहीं होती। आम मुंबईकरों की दृष्टि में यह भ्रष्टाचार का एक और रूप है। वंशवाद और बीएमसी में सत्ता का केंद्रीकरण इन सभी समस्याओं की जड़ एक ही बिंदु पर आकर मिलती है—बीएमसी पर वंशवादी सत्ता। आरोप है कि वर्षों तक एक परिवार के प्रभुत्व के कारण बीएमसी एक लोकतांत्रिक संस्था न रहकर निजी स्वामित्व की तरह संचालित होने लगी। उस परिवार के “लेफ्ट हैंड” और “राइट हैंड” को विभिन्न वार्ड समितियों, स्थायी समितियों और महत्वपूर्ण पदों पर बैठाया गया। निर्णय प्रक्रिया कुछ गिने-चुने लोगों के हाथों में केंद्रित हो गई। ठेके, निविदाएँ, परियोजनाएँ—सब कुछ एक तय ढांचे में ही घूमता रहा। इसी सत्ता-छत्रछाया में अनियमितताओं, भ्रष्टाचार और घोटालों के बीज बोए गए—ऐसी आलोचना होती रही है। जिम्मेदारी तय किए बिना विफलताओं को ढकने के लिए भावनात्मक राजनीतिक मुद्दों का सहारा लिया गया। शहर को स्वच्छ बनाने के बजाय सत्ता बचाने को प्राथमिकता दी गई—यह आरोप मुंबईकर आज खुले तौर पर कर रहे हैं। बदलाव की आवश्यकता! यदि मुंबई को वैश्विक स्तर का शहर बनाना है, तो पारदर्शिता, जवाबदेही और दीर्घकालीन योजना के बिना कोई विकल्प नहीं है। केवल घोषणाओं, भावनात्मक राजनीति या व्यक्ति-केंद्रित सत्ता के आधार पर शहर नहीं चल सकता। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन जैसे बुनियादी विषय में विफलता का असर स्वास्थ्य, पर्यावरण और शहर की छवि पर पड़ता है। और इसलिए आज यह दृढ़ता से कहने का समय आ गया है— बीएमसी किसी एक परिवार की जागीर नहीं है। BMC is not a family business #notafamilybusiness

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