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बीएमसी चुनाव : ठाकरे ‘कोलैब’ और जेन-ज़ी का ‘एग्ज़िट पोल’!
गोरगांव पत्रा चॉल घोटाले का माल किसने हड़पा?
पर्यावरण का मुखौटा, बीएमसी के फैसलों की अव्यवस्था… ठाकरे दौर के कुप्रबंधन ने ‘बेस्ट’ को पटरी से उतार दिया!
परिवारवादी सत्ता और मुंबई के विकास पर ब्रेक—आरे मेट्रो कारशेड विवाद और रुका हुआ मेट्रो-3 प्रोजेक्ट!
मुंबई STP परियोजना: 20 वर्षों की देरी, 26 हज़ार करोड़ का खर्च और BMC की निर्णयहीनता की कीमत!
हम दो, हमारे दो… परफेक्ट फैमिली!
टांग टिंग टिंगाक… टांग टिंग टिंगाक… टांग टिंग टिंगाक… टूम…
पहचान की बासी खिचड़ी का 'कॉम्बो मील…'
BMC अग्निशमन दल में घोटाले और परिवारवादी सत्ता में शहर की सुरक्षा खतरे में!
BMC में ठोस कचरा प्रबंधन की दुर्दशा: परिवारवादी सत्ता के तहत पनपी घोटालों की संस्कृति...
मिठी की गाद में फँसे अभिनेता डिनो मोरिया का मातोश्री कनेक्शन क्या है?
BMC की आड़ में परिवारवाद की ‘खिचड़ी’ कहाँ पकी?
अस्तित्व की लड़ाई… तुम्हारी या मेरी?
मुंबई की ‘‘पिगी बैंक’’ और दो भाइयों की ‘‘बीमा पॉलिसी’’!
BMC के 12 हज़ार करोड़ के कामों पर CAG की चोट: एक परिवार की छत्रछाया में पनपा भ्रष्टाचार उजागर!
BMC का कोविड डेड बॉडी बैग घोटाला: महामारी में मृतकों के सिर का मक्खन किसकी थाली में गया?
कोहिनूर मिल: मराठी मज़दूरों की कब्रगाह पर खड़ा राजनीतिक–रियल एस्टेट साम्राज्य!
BMC का जम्बो कोविड सेंटर घोटाला: परिवारवाद की छत्रछाया में महामारी के दौरान भी तिजोरी पर डाका!
मुंबई में मराठी स्कूलों के बंद होने का ज़िम्मेदार कौन?
रिश्ता वही, नीयत नई
हम दो भाई, मलाई की कमाई!
विकास के लिए पेंग्विन के आंसू !
कैशिकोल : भ्रष्टाचार का अटूट जोड़!
घोटालेबाजों का फ्रेम गेम!
शहर मुंबईकरों का है, खानदानी जागीर नहीं!
मनमानी घर-घर की : बीएमसी फिल्म्स!
बीएमसी स्कूल चलें हम : नारे का दिखावा!
बीएमसी का भ्रष्ट दरबार!
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रंगराव पुरानी, समझदार पीढ़ी के एक बेहद सूक्ष्म दर्शक हैं। उन्होंने गिरगांव के थिएटरों में श्रीराम लागू की आवाज़ का रौब देखा है और काशीनाथ घाणेकर की सीटियाँ भी सुनी हैं। आज भी रंगराव सुबह उठते ही सामने लगे होर्डिंग को देखकर राजनीति को किसी नाटक की पटकथा की तरह परखते हैं। आज सामने वाले नाके पर दो भाइयों की ‘युति’ का पोस्टर लगा था, और रंगराव के होंठों पर अपने आप ही फ़िल्म नटसम्राट का एक संवाद आ गया— “एक अभिनेता के तौर पर तो तू घटिया है ही… लेकिन एक इंसान के तौर पर भी तू बेहद नीच निकला!” रंगराव को लगता है कि मुंबई महानगरपालिका का यह चुनाव कुछ पार्टियों के लिए एक पुराना, बार-बार पिट चुका नाटक नए नाम के साथ फिर से मंच पर लाने की बेताब कोशिश है। नटसम्राट में अप्पासाहेब बेलवलकर ने कहा था, “कोई घर देगा क्या, घर?” यहाँ दोनों भाई मुंबई की गलियों में घूम-घूमकर पूछ रहे हैं, “कोई सत्ता देगा क्या, सत्ता?” लेकिन रंगराव के मन में सवाल है— जिन लोगों ने अपने अहंकार की वजह से मुंबई के विकास को कभी ‘नटसम्राट’ बनने ही नहीं दिया, उन्हें फिर से एक बार “वन्स मोर” क्यों दिया जाए? उन्हें श्रीराम लागू का वह मशहूर कथन याद आ गया— “अब भगवान को रिटायर कर दो!” रंगराव मुस्कुराते हुए खुद से बुदबुदाए, “डॉक्टर साहब, भगवान के साथ-साथ अब इन ‘वारसदार’ ठाकरे भाइयों को भी राजनीतिक रिटायरमेंट देने का समय आ गया है!” पिछले कई वर्षों से इन दोनों भाइयों ने मुंबई महानगरपालिका को अपनी निजी ‘प्राइवेट विंग’ समझ रखा है। एक को ‘वीटो पावर’ चाहिए और दूसरा सिर्फ़ ‘प्रॉम्प्टिंग’ करना चाहता है। लेकिन इस पारिवारिक जुगलबंदी में मुंबई का विकास किसी फटे हुए परदे की तरह लटका हुआ है। इस नाटक का ‘प्लॉट’ देखिए—कितना दिलचस्प है! एक भाई का ‘इंजन’ भाप छोड़-छोड़कर थक चुका है और दूसरा अपना ‘धनुष्य-बाण’ संभाल नहीं पाया। अब समाधान क्या है? तो जवाब है— ‘मराठी अस्मिता’ का संगीत नाटक शुरू कर दो! यहाँ रंगराव को कट्यार काळजात घुसली का संवाद याद आता है— “संगीत साधना है, धंधा नहीं!” उसी तरह राजनीति भी जनसेवा का माध्यम होनी चाहिए थी, लेकिन इन दोनों भाइयों ने मिलकर उसे ‘फैमिली बिज़नेस’ बना दिया है। महानगरपालिका की तिजोरी उन्हें अपने खानदान का कोई ‘सम्मान पत्र’ लगती है, जो हर पाँच साल में उन्हीं को मिलना चाहिए। यह युति प्रेम की अभिव्यक्ति नहीं है, बल्कि “अपनी दुकान बचाने के लिए किया गया एक सुविधाजनक विलय” है। जैसे किसी गिरते हुए नाटक को भीड़ खींचने के लिए दो पुराने सुपरस्टार्स को साथ लाया जाता है, वैसे ही अब ये दोनों भाई गले में गले डालकर चिल्ला रहे हैं— “हम ही तुम्हारे तारणहार हैं!” अंत में रंगराव ने अपने चश्मे के काँच को साफ़ किया, आईने में खुद को देखा और बुदबुदाए— “यह राज्य तुम्हारा नहीं, यह राज्य जनता का है!” (यह संवाद उन्होंने किसी ऐतिहासिक नाटक में सुना था।) मुंबई इन दो भाइयों की ‘जागीर’ नहीं है कि वे बैठकर आपस में उसे बाँट लें। मुंबईकरों को अब ‘नेपोटिज़्म’ का यह उबाऊ नाटक नहीं चाहिए—उन्हें विकास का कोई ‘ब्लॉकबस्टर’ चाहिए। रंगराव दुकान से बाहर निकले और उस पोस्टर को देखकर ज़ोर से हँस पड़े। “अरे साहब, दर्शक अब समझदार हो गया है! आपकी यह ‘भाईचारा’ और सत्ता के लिए चल रही यह ‘ट्रैजेडी’ अब फ्लॉप होने वाली है। क्योंकि मुंबई को अब ‘अभिनेता’ नहीं, बल्कि सच में काम करने वाले ‘नायक’ चाहिए!” BMC is not a family business #notafamilybusiness

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पत्रा चाळ - 'कौटुंबिक व्यवसायाचा' सुवर्णकाळ!
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कोहिनूर का 'काला' बाज़ार: मज़दूर हुए बर्बाद, और 'परिवार' हुआ आबाद!
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मुंबई STP परियोजना: 20 वर्षों की देरी, 26 हज़ार करोड़ का खर्च और BMC की निर्णयहीनता की कीमत!
मुंबई STP परियोजना: 20 वर्षों की देरी, 26 हज़ार करोड़ का खर्च और BMC की निर्णयहीनता की कीमत!
लाडले के पैर अभी भी पालने में... पेंग्विन के पैर AC में; और मुंबईकर गड्ढे में!
जनता त्रस्त, युवराज 'ढिंंचक-ढिंचक' में मस्त! पापा...! पेंग्विन दिलाओ ना!
सत्ता की सवारी इस बार पड़ेगी भारी... !
हम दो, हमारे दो… परफेक्ट फैमिली!
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फोटो में नदी साफ, सड़क पर मुंबई गर्क! GPS फर्जी, फोटो फर्जी... पर घोटाला एकदम असली!
पहचान की बासी खिचड़ी का 'कॉम्बो मील…'
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मराठी का ढोंग और उर्दू में 'सलाम'... UBT का दोहरा चेहरा!
BMC में 12,000 करोड़ का घोटाला और कोविड के 3,500 करोड़ का हिसाब गायब; मुंबईकरों के पैसे पर डाका? CAG की रिपोर्ट ने मचाई खलबली!
कोविड जंबो सेंटर का 'जंबो' घोटाला? मुंबईकरों की जान से खिलवाड़ और पैसों की लूट!
BMC अग्निशमन दल में घोटाले और परिवारवादी सत्ता में शहर की सुरक्षा खतरे में!
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मिठी की गाद में फँसे अभिनेता डिनो मोरिया का मातोश्री कनेक्शन क्या है?
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मुंबई की रक्षा या 'वोट बैंक' की गंदी राजनीति? - मुंबई को 'मिनी-पाकिस्तान' बनने से बचाएं!
रिश्ता वही, नीयत नई
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मुंबई का अपराधी...!