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BMC अग्निशमन दल में घोटाले और परिवारवादी सत्ता में शहर की सुरक्षा खतरे में!
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BMC अग्निशमन दल में घोटाले और परिवारवादी सत्ता में शहर की सुरक्षा खतरे में!

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मुंबई केवल देश की आर्थिक राजधानी ही नहीं है, बल्कि करोड़ों लोगों का आश्रय भी है। ऊँची इमारतों, घनी आबादी, व्यावसायिक परिसरों, मॉल्स, नाइट क्लबों और झोपड़पट्टियों से घिरे इस शहर में अग्नि-सुरक्षा कोई विलासिता नहीं, बल्कि जीवन और मृत्यु का प्रश्न है। लेकिन गोवा के अरपोरा स्थित ‘बर्च बाय रोमियो लेन’ नाइट क्लब में 6 दिसंबर 2025 की मध्यरात्रि लगी भीषण आग में 25 लोगों की जलकर मृत्यु होने के बाद, मुंबईकरों के मन में एक ही डर घर कर गया है— “अगर कल ऐसी ही घटना मुंबई में हुई तो?” यह प्रश्न काल्पनिक नहीं है। 29 दिसंबर 2017 को लोअर परेल के कमला मिल्स परिसर में एक पब में लगी आग में 14 निर्दोष नागरिकों की मृत्यु हुई थी और 55 से अधिक लोग घायल हुए थे। उस घटना के बाद व्यवस्था में वास्तव में सुधार हुआ—यह दावा आज भी क्या दृढ़ता से किया जा सकता है, यही असली सवाल है। वास्तविकता यह है कि मुंबई महानगरपालिका (BMC) के अग्निशमन विभाग से जुड़े एक के बाद एक उजागर हुए घोटाले यह स्पष्ट करते हैं कि शहर की अग्नि-सुरक्षा आज भी गंभीर खतरे में है। अग्निशमन विभाग: जीवन-रक्षक प्रणाली या ‘सोने की खान’? किसी भी महानगर में अग्निशमन विभाग केवल एक प्रशासनिक शाखा नहीं होता, बल्कि वह नागरिकों की सुरक्षा की पहली ढाल होता है। ऊँची इमारतों को अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) देने से लेकर आपातकाल में जान बचाने तक की जिम्मेदारी इसी विभाग की होती है। लेकिन मुंबई में—विशेष रूप से उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में शिवसेना के लंबे शासनकाल के दौरान—यही विभाग भ्रष्टाचार और अनियमितताओं का केंद्र बन गया, ऐसे आरोप बार-बार सामने आए हैं। उपकरणों की खरीद, भर्ती प्रक्रिया, सेवा शुल्क, अनापत्ति प्रमाणपत्र—हर स्तर पर घोटालों की कड़ी सामने आई है। इसका प्रत्यक्ष परिणाम यह हुआ कि कागज़ों पर सुरक्षित दिखने वाली कई इमारतें वास्तव में मौत के जाल बन गईं। कमला मिल्स मामला और उच्च न्यायालय की फटकार कमला मिल्स अग्निकांड के मामले में मुंबई उच्च न्यायालय ने बीएमसी को कड़े शब्दों में फटकार लगाई थी। न्यायालय ने स्पष्ट कहा था कि यह दुर्घटना प्रशासन की नियमों का सख्ती से पालन करने में विफलता का परिणाम है। “अब बीएमसी को अपना घर ठीक करने की आवश्यकता है,” ऐसा न्यायालय ने कहा था। लेकिन सवाल यह है कि उन टिप्पणियों के बाद व्यवस्था में कितने मूलभूत सुधार वास्तव में हुए? घोटालों की श्रृंखला: कुछ प्रमुख उदाहरण 1) भर्ती घोटाला: 2023 में अग्निशमन विभाग की 910 पदों की भर्ती में फर्जी नियुक्ति पत्र, झूठे चिकित्सा प्रमाणपत्र और उम्मीदवारों से करोड़ों रुपये वसूलने के मामले सामने आए। जांच में लगभग 2.3 करोड़ रुपये एकत्र किए जाने का खुलासा हुआ। यदि जीवन-रक्षक विभाग में ही भर्ती घोटाला हो, तो उसकी विश्वसनीयता कैसे बनी रह सकती है? 2) अग्निशमन सेवा शुल्क घोटाला: 2021 में मुंबई भाजपा अध्यक्ष और विधायक अमित साटम ने 5,000 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप लगाया। डेवलपर्स से शुल्क न लेकर उन्हें छूट देना और बाद में निवासियों से पिछली तारीख से शुल्क वसूलना—यह आम मुंबईकरों के साथ सीधी धोखाधड़ी मानी जा रही है। 3) वर्दी खरीद घोटाला: अग्निशमन कर्मियों के लिए वर्दी की खरीद में ठेकेदारों से पैसे लेकर वर्दी की आपूर्ति न करने के मामले सामने आए। कर्मचारियों को अपनी जेब से वर्दी खरीदनी पड़ी और बीएमसी को लगभग 12 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। 4) टर्नटेबल सीढ़ी खरीद घोटाला: 68 मीटर ऊँची टर्नटेबल सीढ़ी की खरीद के लिए निविदा शर्तों में जानबूझकर बदलाव कर एक विशेष कंपनी को लाभ पहुँचाने का आरोप है। केवल 4 मीटर अतिरिक्त ऊँचाई के लिए प्रति सीढ़ी 10 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च किए गए—कुल मिलाकर लगभग 40 करोड़ रुपये की फिजूलखर्ची। प्रतिस्पर्धा खत्म कर नगर निगम को नुकसान पहुँचाया गया, ऐसा आरोप है। 5) अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) में अनियमितताएँ: अपर्याप्त अग्नि-सुरक्षा के बावजूद कई ऊँची इमारतों को NOC दिए जाने के आरोप हैं। फर्जी हस्ताक्षर, मुहरें और नियमों की अनदेखी—इन सबने आग की स्थिति में जानमाल के नुकसान का खतरा कई गुना बढ़ा दिया है। इस मुद्दे पर उच्च न्यायालय ने कई बार बीएमसी को फटकार लगाई है। बीएमसी में परिवारवादी सत्ता और मुंबई की सुरक्षा इन सभी घोटालों की कड़ी एक ही जगह जाकर जुड़ती है—बीएमसी पर वर्षों से जमी हुई एक परिवार की सत्ता। आरोप है कि इस लंबे शासन के कारण बीएमसी एक लोकतांत्रिक संस्था न रहकर निजी जागीर की तरह चलाई गई। उस परिवार के ‘लेफ्ट हैंड’ और ‘राइट हैंड’ को विभिन्न समितियों, विभागों और महत्वपूर्ण पदों पर बैठाया गया। ठेके, मंजूरियाँ, NOC—सब कुछ एक परिवार के ‘आशीर्वाद’ से चलने लगा। इसी आशीर्वाद के चलते घोटालों की श्रृंखला जारी रही और उसकी कीमत मुंबईकरों को अपने जीवन के जोखिम पर चुकानी पड़ रही है। यदि गोवा जैसी आग की घटना मुंबई में हुई, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा—यह सवाल अनुत्तरित रह जाएगा। निर्णय का समय अग्निशमन विभाग से जुड़े ये घोटाले केवल आर्थिक अपराध नहीं हैं; ये सीधे तौर पर मुंबईकरों की जान से खिलवाड़ हैं। इस व्यवस्था को यूँ ही छोड़ देना भविष्य की दुर्घटनाओं को न्योता देना है। आगामी महानगरपालिका चुनाव केवल एक राजनीतिक मुकाबला नहीं, बल्कि मुंबई की सुरक्षा पर जनमत संग्रह हैं। और इसलिए यह साफ़ शब्दों में कहना आवश्यक है— याद रखिए, बीएमसी किसी एक परिवार की जागीर नहीं है। BMC is not a family business #notafamilybusiness

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