मुंबईकरों के नसीब में 'गंदा पानी' और नेताओं की जेब में 'मक्खन'!
Videos"२० साल का शानदार 'मास्टरक्लास'! मुंबई को 'इंटरनेशनल सिटी' बनाने का सपना दिखाने वालों को शायद गटर के पानी और बदबू में कुछ ज़्यादा ही दिलचस्पी है। २००२ का एसटीपी (STP) प्रोजेक्ट पूरे २० साल तक लटका रहा। इन २० सालों में मुंबईकरों को आखिर मिला क्या? नदियों के नाम पर बहते खुले नाले और हर सांस के साथ फेफड़ों में भरता प्रदूषण। जब प्रशासन किसी 'फैमिली बिजनेस' की तरह चलाया जाता है, तब टेंडर कैंसिल होते हैं और सिर्फ नेताओं की तिजोरियों का आकार बढ़ता है। और आम मुंबईकर क्या कर रहा है? ज़हरीली हवा में सांस लेने की 'प्रैक्टिस' कर रहा है। डेंगू, मलेरिया और सांस की बीमारियों को मजबूरी में गले लगा रहा है। अस्पतालों की कतारों में लगकर अपनी मेहनत की कमाई दवाइयों पर लुटा रहा है। २६,००० करोड़ का यह 'देर से आया हुआ ज्ञान' (उशिरा सुचलेलं शहाणपण) विकास नहीं, बल्कि मुंबईकरों की सेहत के साथ किया गया एक भद्दा मज़ाक है। आखिर, बीएमसी किसी की निजी जायदाद नहीं है कि जहाँ जनता की जान से ज़्यादा एक 'परिवार' की मर्ज़ी चले।" BMC is not a family business #notafamilybusiness
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